मोबाइल या लैपटॉप ज्यादा चलाना क्यूँ है नुकसानदायक

लगातार मोबाइल देखना हो रहा है खतरनाक

मोबाइल या लैपटॉप ज्यादा चलाना क्यूँ है नुकसानदायक ,पहले आप यह समझें कि मोबाइल का काम क्या है। मोबाइल का काम है किसी दूसरे व्यक्ति को फोन करना, मैसेज भेजना, चैटिंग करना, जरूरी काम निपटाना। इसलिए मोबाइल का उपयोग केवल इन जरूरी काम के लिए ही किया जाना चाहिए। बिना काम के मोबाइल का इस्तेमाल करना आज एक लत सी बनती जा रही है जो मानसिक बीमारी का कारण भी बनती जा रही है। कुछ स्टडीज के मुताबिक, स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट जब आप सोने बेड पर जाते है तो आपके दिमाग की स्लीप रिदम को बदल देती है। दिमाग इस भ्रम में उलझ जाता है कि स्क्रीन लाइट दिन की रोशनी है और इससे हमारे शरीर की स्लीप रिदम में बदलाव आ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्क्रीन पर काफी घंटों तक काम करना या स्‍क्रीन के सामने बैठे रहना आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है। अगर आप छोटे-छोटे पिक्सल्स को देखने में काफी घंटे बिताते हैं तो आप पलक भी कम झपकाते हैं और ब्लू स्क्रीन पर तस्वीरें देखने में आपकी आंखों को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। हम स्क्रीन को अपनी आंखों से ज्यादा दूरी वाले गैप पर नहीं रखते हैं, जिससे हमारी आंखों पर और अधिक प्रेशर पड़ता है। इन सभी समस्याओं से सिर दर्द भी हो सकता है। इसके साथ ही धुंधला दिखना, ड्राई आई और गर्दन और कंधों में दर्द भी हो सकता है।

जब कोई व्यक्ति लगातार टीवी, मोबाइल, लैपटॉप आदि की स्क्रीन पर देखता है, वह भी बिना पलकें झपकाए, तो उसकी आंखों पर तनाव बढ़ जाता है। बिना पलकें झपकाए काम करने से आंखों में पानी आना, जलन होना, आंखों का लाल होना जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। जो आगे चलकर मानसिक तनाव का कारण बन जाता है|

एम्स संस्थान  की दी गयी गाइडलाइंस के अनुसार प्रति व्यक्ति को एक दिन में ज्यादा से ज्यादा दो घंटे मोबाइल चलाना चाहये। आँख रोग विशेषग का यह भी कहना है कि जितनी छोटी स्क्रीन होगी, उतनी समस्या बढ़ेगी, बड़ी स्क्रीन की जगह मोबाइल पर काम करना आंखों पर ज्यादा प्रेशर डालता है। एम्स के डॉक्टरों ने चेताते हुए कहा कि अगर जल्दी ही नहीं इन बातो पर ध्यान नहीं दिया गया तो वो दिन दूर नहीं जब वर्ष 2050 तक 40 से 45 परसेंट बच्चे मायोपिया रोग के शिकार हो जाएंगे।

आपने अपने बड़े बुजुर्गो से भी सुना होगा कि अति हर मसले की समस्याएं किसी भी चीज को जरूरत से ज्यादा करने पर वह बहुत नुकसान देती है इसलिए अब कोशिश करें कि मोबाइल इस्तेमाल करते वक्त आप उसे कम से कम इस्तेमाल करें जितनी जरूरत हो उतना ही करें अगर आप वीडियो गेम खेलते हैं तो भी आप 15:15 मिनट में ब्रेक जरूर लें।

केवल काम करने वाले एडल्ट्स को ही यह समस्या नहीं है बल्कि वह बच्चे जो ज्यादा समय तक कंप्यूटर या फोन का इस्तेमाल करते हैं उन्हें भी यह समस्याएं हो सकती हैं। ज्यादा समय तक स्क्रीन के आगे बैठे रहने से आप उतनी पलक नहीं झपक पाते हैं जितनी आपको झपकनी चाहिए और इससे आपकी नींद भी प्रभावित हो सकती है।

अगर कुछ ही शब्दों में कहें तो हमारी आंखों को हर समय हाइड्रेशन और नरिशमेंट की जरूरत रहती है और इसी वजह से वह पलक झपकाती हैं। जब आप अधिक समय डिजिटल स्क्रीन पर बिताते हैं तो आप कम मात्रा में पलक झपकते हैं जिस कारण आपकी आंखें ड्राई हो सकती हैं।

 

अँधेरे में मोबाइल या टीवी का ना करे उपयोग

हमें अँधेरे में मोबाइल ,लैपटॉप या टीवी का उपयोग नहीं करना चाहये क्यूंकि मोबाइल, लैपटॉप या टीवी से निकलने वाली ब्लू लाइट आंख में मौजूद रेटिना को प्रभावित करती है।इससे आंखे खराब , स्लीप साइकिल का बिगड़ना, और डिप्रेशन तक की बीमारियां हो सकती है. जिसके चलते धीरे-धीरे यह ढीली हो जाती है। रेटिना को नुकसान पहुंचने के बाद धुंधला दिखाई देता है। सोने से पहले और उठने के तुरंत बाद फोन चलाना सबसे खबसे खतरनाक माना जाता है।

स्क्रीन टाइम कैसे कम करे:-

1. टाइम टेबल सेट करें: अगर आप चाहते हैं कि आपकी ये मोबाइल की लत छूटे, तो मोबाइल इस्तेमाल करने का एक टाइम टेबल बना लें. यानि कब चलाना है, कब बंद करना है. सब आपको बता होना चाहिए. इससे आप अपनी इस लत पर काबू पा सकते हैं.

2. स्क्रीन-फ्री बेडरूम: पूरे दिन अच्छा जाए, इसके लिए रात की नींद बहुत जरूरी है. ऐसे में कोशिश करें कि अपने कमरों से इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स जैसे टीवी, वीडियो गेम, मोबाइल को बाहर रखें, ताकि आपका पूरा ध्यान सोने पर हो न की इनको इस्तेमाल करने में.

3. अल्टरनेटिव तैयार करें:  स्क्रीन से दूरी के लिए स्क्रीन का एक विकल्प तैयार करें, ताकि अन्य जगह मसरूफ रहेंगे, तो मोबाइल पर ध्यान नहीं जाएगा.

ज्यादा मोबाइल देखना बीमारी की जड़


फोन को यूज करना भले ही ज्यादातर लोगों की आदत सी बन गई है, लेकिन बहुत ज्यादा फोन यूज करना मानसिक बीमारी का संकेत है। इन मानसिक बीमारियों में डिप्रेशन का नाम भी शामिल है। क्या आपको पता है कि बहुत ज्यादा फोन यूज करना डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारी का संकेत हो सकता है।
बहुत से लोग तो ऐसे हैं, जो स्मार्टफोन को 14-14 घंटे तक यूज करते हैं. आपको बता दें कि स्मार्टफोन का ज्यादा यूज कई बार हानिकारक साबित हो सकता है. फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट से आंख तो कमजोर होती ही है, साथ में एंग्जायटी और एग्रेशन जैसी कई गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं |

FAQ:स्क्रीन टाइम से सम्बंधित सवाल-जवाब

QUESTION:-1 दिन में कितना घंटा मोबाइल चलाना चाहिए?
ANSWER:- एक व्यक्ति को एक दिन में लगभग 1 से 2 घंटे फ़ोन का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि ज्यादा मोबाइल चलाने से हमारे आखों और दिमाग में काफी तनाव पड़ता है। जिसके कारण हम अपने आप को दिमागी रूप से बहुत कमजोर महसूस करते हैं।

QUESTION:-सोते समय मोबाइल को कितनी दूरी पर रखना चाहिए?
ANSWER:-सोते समय कम से कम 3 फीट की दूरी पर आपका मोबाइल होना चाहिए. ऐसा करने से मोबाइल से निकलने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक की ताकत काफी कम हो जाती है और आप पर रेडिएशन का जोखिम भी नहीं रहता. लिहाजा आप अपने तकिए के नीचे फोन रखकर तो कतई न सोएं.

QUESTION:-लगातार ज्यादा देर तक मोबाइल देखने से क्या होता है?
ANSWER:- ज्यादा समय तक लगातार और देर रात तक फोन चलाने से आंखों की पुतलियां (रेटिना) सिकुड़ जाती है जिससे आंखों पर काफी असर पड़ता है. इसके कारण व्यक्ति की पास की नजरें कमजोर हो सकती हैं. इसलिए हर व्यक्ति को थोड़े समय के अंतराल के बाद ही फोन को चलाना चाहिए.

QUESTION:रात में कितने बजे तक मोबाइल चलाना चाहिए?
ANSWER:- सोने से पूर्व एक घंटा पहले कम से कम आपको अपना मोबाइल दूर रखना चाहिए अगर आप रात को सोते वक्त मोबाइल का प्रयोग करते हैं तो आपको अनिद्रा अवसाद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है ।

QUESTION:-स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?
ANSWER:-एम्स की गाइडलाइंस के अनुसार एक दिन में मैक्सिमम दो घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं होना चाहिए।

QUESTION:-बच्चों को मोबाइल कितनी देर तक देखना चाहिए?
ANSWER:-2 से 5 साल के बच्चों को एक घंटे से अधिक स्क्रीन का इस्तेमाल न करने दें. 6 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करना चाहिए. उनके पास सोने, शारीरिक गतिविधि और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पर्याप्त समय होना चाहिए.

QUESTION:-सुबह उठते ही फोन देखने से क्या होता है?
ANSWER:-अगर आप सुबह उठते ही फोन को चेक करने लगते है, तो ये आपके लिए तनाव और एंग्जाइटी का कारण बनने लगता है। दरअसल, एक साथ कई मैसेज, ई मेल्स और तरह तरह की नोटिफिकेशंस आपकी चिंता का कारण बन सकते हैं। दिन की शुरूआत अगर आप मेंटल प्रैशर से करेंगे, तो दिनभर आप तनाव में रहेंगे।

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