सोलर पैनल-SOLAR PANEL

सोलर पैनल-SOLAR PANEL, एक ऐसी डिवाइस या उपकरण है जिसकी मदद से सूर्य की रोशनी को विद्युत उर्जा(Electricity Energy) में बदला जाता है . इसे बनाने के लिए छोटे-छोटे सेल्स को परस्पर संयोजित(Interconnected) किया जाता है जो सूर्य से मिलने वाली रोशनी को अवशोषित(absorbed) कर उन्हें ऊष्मा में कन्वर्ट करते हैं और बिजली का उत्पादन करते हैं, और Direct current यानि Direct Current(DC) में बदलती है | सोलर पैनल ,सूर्य से आने वाली उर्जा को सिलिकॉन सेल (Silicon Cell) की बनी उपकर पर इकट्ठा करके सूर्य की रोशनी (Sun light) को बिजली मे बदल देता है उस एनर्जी को सोलर एनर्जी (Solar Energy) कहते है.

सोलर पैनल-SOLAR PANEL
सोलर पैनल-SOLAR PANEL

सोलर पैनल सिलिकॉन (जो अर्ध-चालक के रूप में कार्य करता है), फॉस्फोरस (नकारात्मक चार्ज) और बोरॉन (सकारात्मक चार्ज) की परतों से बने होते हैं। इसी प्रकार सूर्य का प्रकाश ऊर्जा के विभिन्न कणों से बना है जिन्हें “फोटॉन” कहा जाता है।

सोलर पैनल कैसे काम करता है

सूर्य का प्रकाश , जिसमें फोटोन होता है सूर्य का प्रकाश जब सोलर पैनल पर पड़ता है तब सोलर पैनल में लगे pvcell या सूर्य के प्रकाश में उपस्थित फोटोन को Direct Current(DC) के लिए इलेक्ट्रॉन में बदल देते है . एक सोलर पैनल में बहुत से pvcell होते है ये Direct Current(DC) वायर के द्वारा इन्वर्टर तक पहुँचती है जो Direct Current(DC) को Alternating Current (AC)  में बदल देता है जिसका उपयोग हम अपने घरो के बिजली से चलने वाले समस्त उपकरणों में कर सकते है|

सोलर पैनल सिस्टम के प्रकार

सोलर पैनल सिस्टम मुख्यत:तीन प्रकार के होते है :-

1.ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम 2.ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम 3.हाइब्रिड सोलर सिस्टम

 

ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम

(On grid solar system)

ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम का इस्तेमाल वहां पर किया जाता है, जहां पर बिजली पूरे दिन रहती हो या फिर कुछ देर के लिए जाती हो . ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम में बैटरी और इनवर्टर की जरूरत नहीं पड़ती। इससे आपको डायरेक्ट ही बिजली मिल जाती है।।ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम की मदद से आप बिजली बनाकर वापस बिजली बोर्ड को भेज सकते हैं इससे आपकी बिजली की बचत होने के साथ-साथ आप अपना बिजली का बिल भी कम कर सकते हैं.

मान लीजिए अगर आप 1 दिन में 20 Unit बिजली बनाते हैं और आपके घर में सिर्फ 10 Unit बिजली का इस्तेमाल करते हैं तो बाकी 10 Unit बिजली बोर्ड को चली जाएगी और यह आपके आगे आने वाली बिजली के बिल में से कम हो जाएगी.

 ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम

(Off Grid Solar System)

सिस्टम का इस्तेमाल ऐसी जगह पर किया जाता है जहां पर बिजली कुछ ही घंटे आती है. ऐसी जगह पर Off Grid Solar System लगाया जाता है .इस में सोलर पैनल के साथ में सोलर इनवर्टर लगाया जाता है और बैटरियां लगाई जाती है जिससे कि सोलर पैनल से वह बैटरी चार्ज हो जाती है और रात के समय में भी आपको बिजली मिलती रहती है. इसमें इनवर्टर और बैटरी आपकी जरूरत के हिसाब से ही लगाई जाती है।

 

हाइब्रिड सोलर सिस्टम(Hybrid Solar System)

हाइब्रिड सोलर सिस्टम ,ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम और ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम दोनों की तरह काम कर सकता है. जिसमें आप सोलर पैनल से आने वाली बिजली का इस्तेमाल करके अपने घर के उपकरण को चला सकते हैं और बैटरी को चार्ज कर सकते हैं और अगर ज्यादा बिजली आती है तो यह अतिरिक्त बिजली को मेन ग्रिड में फीड करने की कैपेसिटी भी रखता है जिससे आपका बिजली बिल काफी हद तक कम आता है ।बिजली बिलिंग के समय सरकार या बिजली कंपनी आपके बिजली बिल में निर्यात की गई यूनिट्स को एडजस्ट करेगी।

1.मोनोक्रिस्टलाइन सौर पैनल:-

मोनोक्रिस्टलाइन सौर पैनल शुद्ध सिलिकॉन से बने होते हैं ,इसमें इस्तेमाल किया गया सिलिकॉन सिंगल क्रिस्टल सिलिकॉन है।कम धूप में इसकी बेहतरीन परफॉर्मेस की वजह यह है कि सेल का रंग गहरा काला होता है इसलिए ज्यादा प्रकाश को अवशोषित करती है,इसके किनारे कटे हुए होते हैं| अगर तुलना की जाए तो जहां एक साधारण सोलर पैनल केवल दिन में 8 घंटे तक काम करता है, जबकि मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल दिन में 10 घंटे तक ऊर्जा का उत्पादन कर सकता है. क्योंकि, इसके सूरज की कम रोशनी में काम करने की क्षमता बेहतरीन होती है. इस सोलर पैनल की मदद से सूरज की कम रोशनी में भी बिजली तैयार की जा सकती है और इस पैनल की लाइफ सामान्य सोलर पैनल से कहीं ज्यादा होती है. मोनोक्रिस्टलाइन सिलिकॉन सोलर सेल्स (Silicon Solar Cell) को इस तरह से डिजाइन किया जाता है, जिससे मुक्त इलेक्ट्रॉन्स को सेल की इलेक्ट्रिक फील्ड या सर्किट में एक तय दिशा दी जा सके. जिससे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चलाया जा सकता है.

2.पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल

पॉलीक्रिस्टलाइन सौर पैनल, जिसे मल्टी-क्रिस्टलीय या पॉली-सी सौर पैनल के रूप में भी जाना जाता है, एक प्रकार का सौर पैनल है जो कई सिलिकॉन क्रिस्टल से बना होता है। पॉलीक्रिस्टलाइन सौर पैनल कच्चे सिलिकॉन को पिघलाकर और चौकोर या आयताकार ब्लॉकों में ढालकर बनाए जाते हैं, जिन्हें फिर ठंडा किया जाता है और पतले वेफर्स में काटा जाता है। सौर पैनल बनाने के लिए इन वेफर्स को एक साथ जोड़ा जाता है।पॉलीक्रिस्टलाइन सौर पैनलों को उनके विशिष्ट नीले रंग और सौर कोशिकाओं की सतह पर दिखाई देने वाली अनाज जैसी क्रिस्टल संरचना से पहचाना जा सकता है।

3.पीईआरसी  पैनल

पीईआरसी सौर पैनल उन्नत तकनीक का उपयोग करके निर्मित होते हैं। यह सौर कोशिकाओं के पीछे एक परत जोड़कर किया जाता है। पारंपरिक सौर पैनल केवल कुछ हद तक ही सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करते हैं और कुछ प्रकाश सीधे उनके माध्यम से गुजरता है। पीईआरसी पैनलों में अतिरिक्त परत इस अनअवशोषित सूर्य के प्रकाश को पैनलों के पीछे की ओर से फिर से अवशोषित करने की अनुमति देती है, जिससे यह और भी अधिक कुशल हो जाती है।

 4.पतली-फिल्म सोलर पैनल

पतली-फिल्म सौर पैनल मोनो और पॉलीक्रिस्टलाइन सौर सेल प्रकारों की तुलना में कम बिजली क्षमता रखते हैं। थिन-फिल्म प्रणाली की दक्षता कोशिकाओं में उपयोग की जाने वाली पीवी सामग्री के प्रकार के आधार पर भिन्न होती है, लेकिन सामान्य तौर पर इनकी कैपेसिटी लगभग 7% से 18% तक होती है।
FAQ:-सोलर पैनल से सम्बंधित सवाल-जवाब

 

QUESTION:-हम सोलर पैनल का उपयोग क्यों नहीं करते?

ANSWER:-सोलर पैनल का नहीं लगवाने का सबसे बड़ा कारण आंधी तूफान का डर रहता है की कही सोलर तेज हवा के करना उड़ नही जाये दोस्तों डरने की कोई बात नही है आप बढ़िया और मजबूत GI कोटेड स्टेंड का उपयोग कर सकते है और खेतो में लगे हुए सोलर को आप तेज आंधी से पहले अच्छे मजबूत तार से बांध सकते है जिससे स्ट्रक्चर नही घुमे और पैनल सुरक्षित रहे

QUESTION:-सोलर पैनल कितने वाट तक का होता है?

ANSWER:-बता दें कि 12 वोल्ट का सोलर पैनल आम तौर पर 165 वाट से शुरू हो जाता है और यह 180 से लेकर 225 वाट तक जाता है। बता दें कि यदि आप इस कैटेगरी में 1 किलो वाट का सोलर सिस्टम लेते हैं, तो इसमें आपको 4 से 6 सोलर पैनल लगेंगे।

QUESTION:-क्या सोलर सिस्टम बिजली से सस्ता है?

ANSWER:-यह पावर ग्रिड से उत्पन्न की गई बिजली से काफी सस्ती और सुविधाजनक है. सोलर सिस्टम की मदद से हम बिजली को अपने घर में पैदा कर सकते हैं. सोलर पैनल की जिंदगी 25 साल के लिए होती है और इन 25 सालों में इसे किसी तरह की मरम्मत या मेंटेनेंस की जरूरत नहीं पड़ती

QUESTION:-एक सोलर पैनल लगाने में कितना खर्च होता है?

ANSWER:-केवल 1 किलोवॉट सोलर पैनल लगाने का खर्च तकरीबन ₹60,000 – ₹65,000 तक होता है. सोलर पैनल के अलावा आपको कुछ और सामान खरीदने हेतु कुछ और खर्चे करने पड़ सकते हैं जैसे की वायरिंग स्विचिंग के लिए एम सी बी वगेरह, सोलर कनेक्टर, चार्ज-कंट्रोलर, इन्वर्टर वगेरह। 2 किलो वाट का सोलर पैनल लगाने में कितना खर्चा आएगा? लगभग एक लाग रुपये।

QUESTION:-क्या सोलर पैनल पर सरकारी छूट है?

ANSWER:-आप घर पर यदि दो किलोवॉट का सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं तो इसमें करीब 1.20 लाख रुपए का खर्च आएगा. वहीं, सरकार की तरफ से सब्सिडी मिलने के बाद इसके खर्च महज 72 हजार रुपए रह जाएगा. वहीं, 500 केवी तक के सोलर रूफटॉप लगवाने पर 20% तक की सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा दी जाएगी।इस योजना का आवेदन आप संबन्धित वैबसाइट https://solarrooftop.gov.in/ पर कर सकते है ।

QUESTION:-सौर पैनल किसका बना होता है

ANSWER:-सही उत्तर सिलिकॉन है । सौर पैनल आमतौर पर कुछ प्रमुख घटकों से बने होते हैं: सिलिकॉन, धातु और कांच । मानक पैनल या तो मोनोक्रिस्टलाइन या पॉलीक्रिस्टलाइन सिलिकॉन से बने होते हैं। सिलिकॉन , सौर कोशिकाओं में उपयोग की जाने वाली सबसे आम सामग्री है, जो आज बिकने वाले लगभग 90% मॉड्यूल का प्रतिनिधित्व करती है।

QUESTION:-सोलर पैनल लगवाने हेतु क्या कोई सरकारी योजना है

ANSWER:-इसके बाद आप सरकार के पास सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं. आप यदि तीन किलोवॉट का सोलर पैनल लगवाते हैं तो इसमें 72 हजार रुपए का खर्च आएगा. वहीं, आपको सरकार की तरफ से 40 फीसदी यानी लगभग 48 हजार रुपए की सब्सिडी मिल जाएगी.

QUESTION:-सबसे अच्छा सोलर  पैनल कौन सा है?

ANSWER:-सबसे विश्वसनीय और भरोसेमंद सोलर पैनल टाटा पावर सोलर है |

QUESTION:सोलर पैनल बनाने में कौन सी धातु का उपयोग होता है |

ANSWER:-सौर पैनल के निर्माण में सिल्वर (चाँदी) धातु का उपयोग होता है।

QUESTION:-सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले सोलर पैनल का साइज़ व् आकार कितना होता है 

ANSWER:-सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले सौर पैनल 72 सेल और 60 सेल के होते हैं, जिनका आकार क्रमशः 2m x 1m और 1.6mx 1m होता है।

QUESTION:-सोलर पैनल कितने समय तक चलते हैं?

ANSWER:-अधिकांश सौर पैनलों के जीवनकाल के लिए उद्योग मानक 25 से 30 वर्ष है। अधिकांश प्रतिष्ठित निर्माता 25 वर्ष या उससे अधिक के लिए उत्पादन वारंटी प्रदान करते हैं।

QUESTION:-एक सोलर पैनल कितने घरों में बिजली देता है|

ANSWER:-एक किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल में आमतौर पर एक घर की जरूरत की पूरी बिजली मिल जाती है. अगर एक एयरकंडीशनर चलाना है तो दो किलोवाट और दो एयर कंडीशनर चलाना है तो तीन किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल की जरूरत होगी.

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