चोरो द्वारा पैसे चोरी करने के नये-नये तरीके

साइबर क्राइम के मामले हमारे देश में तेजी से बढ़ रहे हैं, जिस वजह से आये दिन लाखो लोग इस अपराध के शिकार हो रहे है ,और चोरो द्वारा पैसे चोरी करने के नये-नये तरीके अपनाये जा रहे है | साइबर क्राइम पूरी दुनिया में सुरक्षा और जांच एजेंसियों के लिए समस्या का सबब बन गया है| साइबर ठग अलग-अलग ट्रिक्स के जरिए लोगों को कंगाल कर रहे हैं| साइबर ठग हर बार हर ग्राहक को ठगने के लिए अलग-अलग पैटर्न अपनाते हैं ,कभी फिशिंग मेल के जरिए ठगी की जाती है तो कभी ओटीपी के जरिए या साइबर जासूसी करके या साइबर एक्सटॉर्शन(किसी खतरे वाले हमले को रोकने के लिए पैसे की मांग करना) आदि तरह के साइबर फ्रॉड कर रहे है |चोरो द्वारा पैसे चोरी करने के नये-नये तरीके साइबर क्राइम

साइबर क्राइम ऐसी क्रिमिनल एक्टिविटी है जिसमें कंप्यूटर, नेटवर्क डिवाइस या नेटवर्क के जरिए ठगी की जाती है. साइबर अपराधी इसके जरिए प्राइवेसी से लेकर पैसे तक उड़ा ले जाते हैं. डेटा हैकिंग, फिशिंग मेल, ओटीपी फ्रॉड और मोबाइल फ्रॉड, सेक्सटॉर्शन जैसे तमाम अपराध हैं जिन्हें साइबर अपराधी अंजाम देते हैं |

साइबर क्राइम के कुछ उदाहरण

     साइबर फिशिंग:

अपराधी फिशिंग ईमेल, सोशल मीडिया संदेश या वेबसाइट के जरिए उपभोक्ताओं से व्यक्तिगत जानकारी चोरी करने की कोशिश करते हैं।

चोरो द्वारा पैसे चोरी करने के नये-नये तरीके साइबर क्राइम

साइबर फिशिंग के लिए धोखेबाज आम तौर पर विशेष ढंग से तैयार किए गए ईमेल, सोशल मीडिया संदेश, या वेबसाइटों का उपयोग करते हैं जोकि बिलकुल असली वेबसाइट ,ईमेल या सोशल मीडिया सन्देश की तरह ही लगते है । उनका उद्देश्य व्यक्ति को भ्रमित करना होता है ताकि व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत जानकारी को अनिवार्य रूप से शेयर कर दें।

वेबसाइट धोखाधड़ी:

साइबर अपराधी एक फर्जी वेबसाइट बनाकर उसके द्वारा साइबर फ्रॉड करते है । साइबर अपराधी किसी जाने-माने ब्रांड या यहां तक ​​कि किसी मोबाइल फोन कंपनी जैसे Mi आदि की तरह असली दिखने वाली वेबसाइट बनाते हैं और सस्ते मोबाइल  वेबसाइट पर बेचते है जिससे ग्राहक सस्ते के चक्कर में उनकी असली दिख रही फर्जी वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आर्डर कर देता है लेकिन आर्डर करने के बाद ग्राहक कोई मोबाइल नहीं मिलता है। और इस तरह से ग्राहक साइबर क्राइम का शिकार हो जाता है 

रैंसमवेयर:

साइबर अपराधी वायरस और मैलवेयर के जरिए आपके डिवाइस जैसे फ़ोन या कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाते है और फिर आपसे उसे सही करने के लिए आपसे अवैध धनराशि मांगते है जैसा की साइबर अपराधियों ने भारत का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पिछले साल 2022 के अंत में रैंसमवेयर हमले की चपेट में आ गया था।और साइबर अपराधियों ने इस बदले में क्रिप्टोकरेंसी की मांग की थी | हमले के कारण सरकारी अस्पताल में कंप्यूटर संचालित सेवाएं 15 दिनों से अधिक समय तक बाधित रहीं।

फण्ड ट्रांसफर:

इसमें अपराधी धोखे से किसी सरकारी योजना या लालच देकर अनजाने व्यक्तियों से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं जिसमें लोग अपने धन को खो देते हैं।

ऑनलाइन चेंटिंग:

ऑनलाइन चेंटिंग या चुटकुला कहानियों के माध्यम से लोगों को धोखा देने का प्रयास करना। और फिर उनसे अवैध तरीके से धनराशि की मांग करना

साइबर बुलिंग:

सोशल मीडिया अकाउंट पर किसी भी व्यक्ति के बारे में अफवाह या किसी भी तरह का झूट फैलाना , किसी के चरित्र पर ऊँगली उठाना या उसके चरित्र को लेकर गलियां देना, शर्मनाक फोटो या वीडियो पोस्ट आदि साइबर बुलिंग के तहत आता है। साइबर बुलिंग को आप एक तरीके से ऑनलाइन रेगिंग का भी नाम दे सकते हो|और इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल आजकल नाबालिग बच्चो पर किया जाने लगा है |

“साइबर क्राइम की लिस्ट काफी बड़ी है जिसमे में कॉर्पोरेट डेटा की चोरी और बिक्री,क्रिप्टोजैकिंग (जहां हैकर्स उन संसाधनों का उपयोग करके क्रिप्टोकरंसी माइन करते हैं जो उनके पास नहीं हैं),साइबर जासूसी (जहां हैकर्स सरकार या कंपनी के डेटा तक पहुंच बनाते हैं),कॉपीराइट का उल्लंघन,गैरकानुनी जुआ,ऑनलाइन अवैध सामान बेचना,चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी की याचना करना, आदि तरह की प्रमुख है |”

साइबर क्राइम क्यों होते हैं

साइबर अपराधी मोटी रकम कमाने के लिए हमेशा आसान तरीका चुनते हैं । वे अमीर लोगों या बैंक, कैसिनो और वित्तीय कंपनियों जैसे अमीर संगठनों को निशाना बनाते हैं, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में पैसा प्रवाहित होता है और संवेदनशील जानकारी हैक करते हैं। इन साइबर क्राइम्स से बचने के लिए, लोगों को सावधान रहना, सुरक्षित पासवर्ड उपयोग करना, विश्वसनीय वेबसाइट और ऐप्स का उपयोग करना, और अपने डिजिटल उपकरणों को अपडेट करना जरूरी है। इसके अलावा, साइबर अपराधियों से बचने के लिए सरकारी संस्थानों और सुरक्षा एजेंसियों से मदद लेना भी महत्वपूर्ण है।

साइबर क्राइम से बचने / रोकथाम के लिए उपाय

मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें:– कभी भी आप अपने ऑनलाइन सोशल मीडिया अकाउंट,ऑनलाइन बैंकिंग,आदि तरह के एकाउंट्स में  Sandhya@123,Sumit@1980,Ravi@0000,Dinesh@1212 आदि तरह के पासवर्ड उपयोग न करे| अपने प्रत्येक ऑनलाइन खाते के लिए मजबूत से मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें। एक मजबूत पासवर्ड कम से कम 12 वर्णों का होना चाहिए और इसमें अपरकेस और लोअरकेस अक्षरों, संख्याओं और स्पेशल केरक्टर का मिश्रण होना चाहिए। जिससे कोई भी साइबर अपराधी आसानी से आपके पासवर्ड को क्रैक ना कर पाये|

अपने कम्प्युटर या फोन के सॉफ़्टवेयर को अप-टू-डेट रखें:– अपने कंप्यूटर या फ़ोन को हमेशा लेटेस्ट अपडेट करते रहे और साथ ही साथ आपके फ़ोन में जो भी एप्लीकेशन है उनको भी नियमित रूप से समय-समय पर अपडेट करते रहे

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें:– टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का मतलब है की आप अपने सभी ऑनलाइन अकाउंट पर दोहरी सिक्योरिटी को इनेबल कर देना जिससे उपयोगकर्ता को दोहरी सुरक्षा का लाभ मिल जाता है

संदिग्ध ईमेल से सावधान रहें:– कभी भी स्पैम मैसेज या जो मैसेज देखने में आपको सस्पेक्ट लगे उन तरह के ईमेल से आपको सावधान रहना चाहये  , उन ईमेल से सावधान रहें जो आपसे लिंक पर क्लिक करने या व्यक्तिगत जानकारी प्रदान करने के लिए कहते हैं। क्यूंकि उन ईमेल पर अपनी पर्सनल जानकारी देना आपको नुकसान कर सकता है |

एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर सॉफ़्टवेयर का उपयोग करें:– अपने कंप्यूटर और मोबाइल  को हमेशा अप-टू-डेट रखना चाहये ताकि किसी भी तरह का बग्स या वायरस आपके कंप्यूटर या मोबाइल को नुकसान ना पहुंचा सके | वायरस, स्पाईवेयर और अन्य दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर से बचाने के लिए एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और नियमित रूप से अपडेट करें।

सोशल मीडिया पर अपनी पर्सनल जानकारी शेयर न करें:– सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपको अपनी पर्सनल जानकारी शेयर करना भारी पड़ सकता है क्यूंकि साइबर अपराधी आपकी पर्सनल जानकारी का इस्तेमाल धोखाधडी से पैसे चुराने के लिए कर सकते है,ब्लैकमैलिंग करने के लिए कर सकता है|

सुरक्षित नेटवर्क का उपयोग करें:– सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क का मतलब है की आप किसी भी ऐसे व्यक्ति का वाई-फाई उपयोग करने से बचे जिसको आप जानते न हो , क्यूंकि ये ज्यादातर असुरक्षित होते है और किसी भी हैकर द्वारा आसानी से आपका मोबाइल या कंप्यूटर हैक किया जा सकता है जो आपके लिए बहुत ज्यादा हानिकारक हो सकता है |अपने इंटरनेट कनेक्शन को एन्क्रिप्ट करने और अपनी ऑनलाइन पहचान छिपाने के लिए आप किसी भी ब्रांडेड कंपनी का अच्छी क्वालिटी का वीपीएन(VPN) उपयोग करे ताकि आपके फ़ोन की सुरक्षा बनी रही और ताकि कोई हैकर आपका कंप्यूटर या मोबाइल को हैक ना कर पाये।

साइबर धोखाधड़ी के मामले में क्या करें?

साइबर क्राइम पर लगाम लगाने के लिए साइबर पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर 1930 लॉन्च किया।इससे आपको साइबर ठगी के पैसे भी मिल सकते हैं, इस हेल्पलाइन के जरिए पुलिस एक करोड़ से ज्यादा की रकम धोखाधड़ी से बचाने में सफल रही है।

अगर आपके साथ किसी भी तरह का कोई भी साइबर क्राइम अगर आपके साथ होता है तो आप सम्पूर्ण जानकारी के साथ वेबसाइट https://cybercrime.gov.in/  पर शिकायत भी कर सकते है और ये वेबसाइट भारत सरकार द्वारा संचालित है |

सुरक्षा सावधानियां

1. विशेष रूप से मोबाइल फोन, महंगे जूते, चमड़े के सामान, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट आदि जैसे महत्वाकांक्षी उत्पादों पर भारी ऑनलाइन छूट के चक्कर में न पड़ें। यदि ऑफर बहुत अच्छा है, तो संभवतः ऐसा नहीं है।

2. शॉपिंग पोर्टल की साख के बारे में इंटरनेट पर खोजें। यदि वेबसाइट पर बड़ी संख्या में ग्राहकों द्वारा डिलीवरी न होने की शिकायत आ रही है ,तो हो सकता है की वेबसाइट संभवतः नकली है।

3. यदि website ग्राहक को कैश-ऑन-डिलीवरी की पेशकश कर रही है, तो आप हमेशा कैश-ऑन-डिलीवरी वाला ऑप्शन ही चुनेंगे जिससे आपके साथ धोखाधडी होने के चांसेस लगभग खत्म हो जाते है

4. किसी भी तरह की वेबसाइट पर शॉपिंग करने से पहले हमेशा ध्यान रखना चाहये की जो आप वेबसाइट उपयोग कर रहे है वो वेबसाइट भरोसेमंद हो  क्यूंकि जो फ्रॉड वेबसाइट होती है वो आपके बैंक कार्ड जैसे डेबिट कार्ड/क्रेडिट कार्ड के नंबर ,ओटीपी,सीवीवी या इन्टरनेट बैंकिंग आदि के डाटा को कैप्चर कर लेती है और इसे डार्क वेब(Dark Web) पर बेच सकती है। इसलिए, अप्रयुक्त ई-कॉमर्स साइटों पर क्रेडिट/डेबिट कार्ड का उपयोग करके भुगतान न करें जब तक कि भुगतान लिंक आपको सत्यापित, सुरक्षित भुगतान गेटवे पर नहीं ले जा रहा हो।

5.सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारियां कभी भी किसी व्यक्ति के साथ शेयर ना करें, किसी भी स्थिति में ओटीपी किसी के साथ शेयर न करें, एक ओटीपी शेयर करने की वजह से आपका बैंक खाता खाली हो सकता है जिस वजह से आपको लाखो रूपये की चपत लग सकती है| देश में ऐसे बहुत सारे मामले आये है जब लोगों ने ओटीपी और बैंकिंग डिटेल्स शेयर कर लाखों गंवाए हैं | डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का पिन, सीवीवी नंबर किसी के साथ शेयर न करें| आधार और पैन कार्ड के विवरण भी किसी से शेयर न करें.

भारत में साइबर क्राइम के लिए क्या कानून है?

साइबर कानून 17 अक्टूबर वर्ष 2000 मे अस्तित्व में आया। इसमें 13 अध्यायों में विभक्त कुल 94 धाराएं हैं। 27 अक्टूबर 2008 को इस क़ानून को एक घोषणा द्वारा संशोधित किया गया। इसे 5 फ़रवरी 2009 को फिर से संशोधित किया गया, जिसके तहत अध्याय 2 की धारा 3 में इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर की जगह डिजिटल हस्ताक्षर को जगह दी गई। यह कानून इलेक्ट्रॉनिक संचार का उपयोग करके किए गए लेनदेन के लिए कानूनी मान्यता प्रदान करने और साइबर अपराध के लिए कानूनी उपाय प्रदान करने के लिए अधिनियमित (Enacted) किया गया था।साइबर कानून अपराधों और इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स से संबंधित मुद्दों से संबंधित है।

आईटी अधिनियम के तहत कानूनी धाराये:-

धारा 43:- कंप्यूटर, कंप्यूटर सिस्टम आदि को नुकसान पहुंचाने पर जुर्माना

सजा: नुकसान के लिए मुआवजा, जिसमें तीन साल तक की कैद या 5 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों शामिल हो सकते हैं।

धारा 66:- कंप्यूटर सिस्टम के साथ हैकिंग

सजा: तीन साल तक की कैद या 2 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों।

धारा 66बी:- चुराए गए कंप्यूटर संसाधन या संचार उपकरण को बेईमानी से प्राप्त करने के लिए सजा

सजा: तीन साल तक की कैद या एक लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों।

धारा 66सी:- पहचान की चोरी के लिए सजा

सजा: तीन साल तक की कैद या एक लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों।

धारा 67:- इस धारा के तहत अगर आप सोशल मीडिया जैसे Facebook,Instagram,Twitter आदि पर आपत्तिजनक, भड़काऊ या अलग-अलग समुदायों के बीच नफरत पैदा करने वाला पोस्ट, वीडियो या तस्वीर शेयर करते हैं, तो आपको जेल जाना पड़ सकता है

सजा: तीन साल तक की कैद या 5 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों।

धारा 72:– गोपनीयता और निजता का उल्लंघन

सजा: दो साल तक की कैद या एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि साइबर अपराध की सजा अपराध की गंभीरता और अन्य कारकों के आधार पर भिन्न हो सकती है। कुछ मामलों में, आईटी अधिनियम (IT Act) में उल्लिखित सजा से अधिक गंभीर सजा हो सकती है। उदाहरण के लिए, आईटी अधिनियम के तहत साइबर आतंकवाद आजीवन कारावास (Life imprisonment) से दंडनीय है।|

FAQ:-साइबर क्राइम से जुड़े संबन्धित सवाल

QUESTION:-इंडिया मे सबसे ज्यादा साइबर अपराध कहाँ होते हैं?

ANSWER:-राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, सबसे अधिक साइबर अपराध के मामले तेलंगाना (10,303) से सामने आए। इसके बाद उत्तर प्रदेश (8,829), कर्नाटक (8,136), महाराष्ट्र (5,562) और असम (4,846) हैं, जबकि दिल्ली में ऐसे 356 मामले दर्ज किए गए।

QUESTION:-साइबर क्राइम कितने साल का होता है?

ANSWER:-भारत में हैकिंग के लिए तीन साल तक जेल की सजा और/या पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. अगर दोबारा यही अपराध किया जाता है तो कारावास की अवधि को दस लाख रुपये तक के जुर्माने के साथ दस साल तक बढ़ाया जा सकता है.

QUESTION:-ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो क्या करें?

ANSWER:-इसके लिए https://www.cybercrime.gov.in/ पर क्लिक करना होगा। पुलिस स्टेशन में फ्रॉड के 3 दिनों के अंदर शिकायत दर्ज करनी होगी। अगर आप तत्काल प्रभाव से बैंक और थाने में शिकायत दर्ज करते हैं, आपके अकाउंट में अगले 10 दिनों में पूरे पैसे वापस आ सकते हैं।

QUESTION:-अपराध और साइबर अपराध में क्या अंतर है?

ANSWER:-साइबर अपराध और पारंपरिक अपराध के बीच अधिक अंतर नहीं है। पारंपरिक अपराध शारीरिक रूप से उपस्थित होकर किए जाते हैं और उन्हीं अपराधों को दूर बैठकर कंप्यूटर के माध्यम से जब किया जाता है तब वह साइबर अपराध बन जाते हैं।

QUESTION:-ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो क्या करें?
ANSWER:-इसके लिए https://www.cybercrime.gov.in/ पर क्लिक करना होगा। पुलिस स्टेशन में फ्रॉड के 3 दिनों के अंदर शिकायत दर्ज करनी होगी। अगर आप तत्काल प्रभाव से बैंक और थाने में शिकायत दर्ज करते हैं, आपके अकाउंट में अगले 10 दिनों में पूरे पैसे वापस आ सकते हैं।
QUESTION:-भारत में साइबर क्राइम की जांच को सुलझाने मे कितना समय लगता है?
ANSWER:-किसी भी साइबर क्राइम की जांच को सुलझाने में न्यूनतम समय 3 महीने लगता है और कुछ जटिल मामलों में अधिकतम 12 महीने लग सकते हैं।
QUESTION:-आईटी एक्ट में कुल कितनी धाराएं हैं?
ANSWER:-इसमें 13 अध्यायों में विभक्त कुल 94 धाराएं हैं। 27 अक्टूबर 2008 को इस क़ानून को एक घोषणा द्वारा संशोधित किया गया।

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